Page 18 - 4.4 Abhivyakti
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“ माकशीट स बलन्स शीट नह  बनती “
                                                    े
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                                                                  PROF. ASHISH H. KACHA
                                                                            ADVISOR
                                                     SHREE SWAMINARAYAN GURUKUL GYNABAG
                                                                 INTERNATIONAL SCHOOL.
                                                                           JUNAGADH






                                                                                                े
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                                                                                ं

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          “माकशीट स बलस शीट नह  बनती” का मतलब यह ह  क  सफ अ  अक (माकशीट) स यह तय नह  होता
           क कोई व्य क्त आग चलकर जीवन या क रयर म आ थक रूप स सफल होगा।

                                                                        े

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          गजरात क अमरली  जल क एक छोट स गाव स दो  शक्षक महा शवरा त्र क त्यौहार म स म्म लत होन क  लए

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                                                                                                         े
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          अमरली स जनागढ़ क  ओर  न म सवार थ स्टशन आया गाड़ी थोड़ी दर रुक  और दोन   शक्षक चाय पीन क                  े
                                                                                                              े
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           लए नजद क म एक चाय क   कटली पर गए, चाय पीत समय उन्ह न एक बहुत ही बड़ा अ  त दृश्य दखा
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          छोटा सा एक बालक  सगरट क पकट क ऊपर बहुत ही अ  छोट-छोट प टग्स बना रहा था जो भी र
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                                                                                 े
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                                                                            े
                                     े
          कागज था उसक ऊपर बहुत ही अ  तरीक स प सल स  ाइग बना रहा था, यह दृश्य उन्ह न दखा थोड़ा
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                                                                                                      े
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                                                                  े
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                                                                                                     े
                                                                       े

          बहुत उस ब  क साथ बातचीत क , समय हुआ  न क जान का दोन   शक्षक वापस उस  न म बठकर
                                                                                                            ै
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                                                                 े
                                                            े
                                                                 े
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                                                                                                े
                                                                                    े
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                                         े
          जनागढ़ क  ओर महा शवरा त्र क मल म चल, वापस आत वक्त दोबारा उस  न को इस स्टशन पर रुकना था
                                              े
          और दोबारा दोन   शक्षक इस चाय क   कटली क पास चाय पीन क  लए गए और वापस उन्ह न वही दृश्य
                                                                           े
                                                                         े
                                                                                                       े
                                                         े

          दखा  क एक छोटा सा लड़का  सगरट क पकट क ऊपर बहुत ही अ   प टग्स बना रहा था दोन   शक्षक क                  े

                                                         े
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                                                                                     े

                                                                                       े
                                                                               ै




          मन म सवाल हुआ  क इतनी अ   प टग्स इतनी कम उम्र म बना रहा ह, ब  स थोड़ा वातालाप  कया और
           फर ब  को बोला  क आप पढ़न क  लए जात हो बटा तो उन्ह न कहा  क नह  मझ यह  व ान, ग णत,
                                                               े
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                                                                                           ु
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                                                                                                               े
                                                                             े
                                                                           ु
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          अ जी यह सारी भाषा यह सारी चीज मझ समझ म नह  आती ह मझ  चत्र बनाना अ ा लगता ह, यह मरी
                                                                                                        ै
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                                                                                                            े
          समझ म आता ह और मझ वह अ ा लगता ह धीर-धीर उस ब  क  पताजी क साथ बातचीत करक उस                             े
                                                                             े

                                                                                        े
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                                                                      े
                         े
          दोन   शक्षक  न उस ब  का पढ़ाई- लखाई का  जम्मा अपन ऊपर  लया,  शक्षक थ दोन  तो  शक्षक क                  े
            ं
                                                                               ै
                                  े
          अदर  स्वाभा वक  रूप  स  एक  ऐसा   दल  रहता  ह  जो   नष्पक्ष  रहता  ह  परोपकारी  रहता  ह  जो  दूसर   को
                                                          ै
                                                                                                   ै
          कल्याण करन क हत हमशा उस  दल क भीतर एक नए  वचार को  नमाण होन का प्रयास रहता ह।
                                                                                    े
                                  े
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                                                                                                      ै
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          धीर-धीर वह लड़का दश क  प्र त  त एम. एस. य नव सट  क  फाइन आटस म पढ़ाई करक आग  नकल,

                                                                                  ्
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                                                                                                         े
                                                                                                    े
          समय क चलत-चलत अमरली  जल क उस छोट स गाव का वह लड़का रलव स्टशन क  क बन क पास
                                                                                                           े
                                                          े
                                                                                   े
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                                                                                          े
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                                                                                       े
          बठकर  सगरट क  पकट क ऊपर  पक्चर बनान वाला वह लड़का हॉलीवड का बहतरीन डायरक्टर बना और
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                                                                                                   े
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          दश और दु नया आज उसको “पान न लन“ क नाम स जानती ह।
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