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“ माकशीट स बलन्स शीट नह बनती “
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PROF. ASHISH H. KACHA
ADVISOR
SHREE SWAMINARAYAN GURUKUL GYNABAG
INTERNATIONAL SCHOOL.
JUNAGADH
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“माकशीट स बलस शीट नह बनती” का मतलब यह ह क सफ अ अक (माकशीट) स यह तय नह होता
क कोई व्य क्त आग चलकर जीवन या क रयर म आ थक रूप स सफल होगा।
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गजरात क अमरली जल क एक छोट स गाव स दो शक्षक महा शवरा त्र क त्यौहार म स म्म लत होन क लए
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अमरली स जनागढ़ क ओर न म सवार थ स्टशन आया गाड़ी थोड़ी दर रुक और दोन शक्षक चाय पीन क े
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लए नजद क म एक चाय क कटली पर गए, चाय पीत समय उन्ह न एक बहुत ही बड़ा अ त दृश्य दखा
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छोटा सा एक बालक सगरट क पकट क ऊपर बहुत ही अ छोट-छोट प टग्स बना रहा था जो भी र
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कागज था उसक ऊपर बहुत ही अ तरीक स प सल स ाइग बना रहा था, यह दृश्य उन्ह न दखा थोड़ा
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बहुत उस ब क साथ बातचीत क , समय हुआ न क जान का दोन शक्षक वापस उस न म बठकर
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जनागढ़ क ओर महा शवरा त्र क मल म चल, वापस आत वक्त दोबारा उस न को इस स्टशन पर रुकना था
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और दोबारा दोन शक्षक इस चाय क कटली क पास चाय पीन क लए गए और वापस उन्ह न वही दृश्य
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दखा क एक छोटा सा लड़का सगरट क पकट क ऊपर बहुत ही अ प टग्स बना रहा था दोन शक्षक क े
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मन म सवाल हुआ क इतनी अ प टग्स इतनी कम उम्र म बना रहा ह, ब स थोड़ा वातालाप कया और
फर ब को बोला क आप पढ़न क लए जात हो बटा तो उन्ह न कहा क नह मझ यह व ान, ग णत,
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अ जी यह सारी भाषा यह सारी चीज मझ समझ म नह आती ह मझ चत्र बनाना अ ा लगता ह, यह मरी
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समझ म आता ह और मझ वह अ ा लगता ह धीर-धीर उस ब क पताजी क साथ बातचीत करक उस े
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दोन शक्षक न उस ब का पढ़ाई- लखाई का जम्मा अपन ऊपर लया, शक्षक थ दोन तो शक्षक क े
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अदर स्वाभा वक रूप स एक ऐसा दल रहता ह जो नष्पक्ष रहता ह परोपकारी रहता ह जो दूसर को
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कल्याण करन क हत हमशा उस दल क भीतर एक नए वचार को नमाण होन का प्रयास रहता ह।
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धीर-धीर वह लड़का दश क प्र त त एम. एस. य नव सट क फाइन आटस म पढ़ाई करक आग नकल,
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समय क चलत-चलत अमरली जल क उस छोट स गाव का वह लड़का रलव स्टशन क क बन क पास
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बठकर सगरट क पकट क ऊपर पक्चर बनान वाला वह लड़का हॉलीवड का बहतरीन डायरक्टर बना और
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दश और दु नया आज उसको “पान न लन“ क नाम स जानती ह।
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