Page 19 - 4.4 Abhivyakti
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           जब बॉलीवड क  दग्गज अ भनता अ मताभ बच्चनजी को कॉफ   वथ करण म पछा गया  क सर आपक
                                                                                          ू
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                                                                                 ं
                                                                                                ू
                                                                                                      े
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                                                                                  े
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           क्या इ ा ह तो उन्ह न कहा मरी दो इ ा ह एक इ ा यह ह नल्सन मडला क ऊपर मवी बन और उसम
                                                                                       े
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           नल्सन का रोल मझ प्राप्त हो और मरी दूसरी इ ा यह ह  क म “पान न लन“ क साथ काम करना चाहता                 ं
                                                                 ै
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           दोस्त  इस लए मझ इस लख का शीषक कछ इस तरीक स बनाना पड़ा क  माकशीट स कभी बलस शीट

                                                                                                        ै
           नह  बनती ह।
                       ै
                    े
           आज म दख रहा हु  व ाथ  उनक माता- पता  सफ और  सफ अको क पीछ पड़ ह और इसी अको क

                                                                                े

                                                                                            ै
                                                                                                         ं
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           वजह स बच्चो म प्रामा णकता,  न ा, आत्म व ास, सहनशीलता का अभाव दखन  को  मलता ह और
                                                                                 े
                                                                                     ं
           आज आत्महत्या जसी घटनाएं  दनप्रती  दन बढ़ती जा रही ह, अम रका क अदर रहना वाला एक भारतीय
                                                                          े
                                                                     ै
                             ै
           प रवार पर प रवार क साथ आत्महत्या इसी लए करता ह क्य  क उनस असफलता सहन नह  हुई, जब
                    ू
                                                                   ै
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                                                                                                    े
                                                                        ं
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                                                                                                       ं
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           जाच हा सल हुई तो मालम हुआ क  उस व्य   का कभी दूसरा नबर नह  आया हमशा वो पहल नबर पर ही
           रहा और उनको कभी असफलता का एहसास ही नह  था।
                                                               े
            ज़दगी म सफलता  सफ माकशीट स नह   मलती; महनत, कौशल, आत्म व ास और प र   तय  को
                                               े




           सभालन क  क्षमता ज़्यादा मायन रखती ह।
                                                  ै
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           हम सभी जानत ह  क परीक्षा म अ  अक लाना ज़रूरी ह। यह हमार प रश्रम और अनशासन को  दखाता
                                                                                              ु
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                                                                  ै
           ह। ल कन क्या  सफ माकशीट स जीवन क  गारट  तय हो जाती ह? उत्तर ह – नह ।
                                                        ं
                                                                         ै
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           माकशीट कवल यह बताती ह  क आपन  कताब  स  कतना सीखा ह, जब क बलस शीट यह  दखाती ह                         ै

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                                                                              ै
                                                                                        ै
            क आपन जीवन और व्यवहार स क्या कमाया ह।        ै
                    े
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                                                                          े

           उदाहरण क तौर पर, कई लोग होत ह जो पढ़ाई म औसत रह ल कन उन्ह न महनत, आत्म व ास, और

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                                                                       े
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                                                                               े

                                                                                    े
           सही अवसर  को पहचानकर बड़ी सफलता पाई। वह  कई टॉपर भी ऐस होत ह  जनक  माकशीट शानदार

                                                                                         ै

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                                                             ं
           ह,  ल कन  अगर  उनम  कौशल,  रचनात्मकता  या  सघष  करन  क   क्षमता  नह   ह,  तो  उनक   बलस  शीट
                                                                      े

                                                                                                       ै

           कमजोर रह जाती ह।   ै
           इस लए  हम   सफ़  माकशीट  पर  ध्यान  नह   दना  चा हए,  ब ल्क  जीवन-कौशल,  आत्म व ास,  सचार-

                                                                                                           ं


                                                        े
           कौशल, और रचनात्मक सोच पर भी काम करना चा हए। यही गण हम असली सफलता  दलात ह।
                                                                       ु

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           अत म म यही क गा –
             ं


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                                                                               े

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           माकशीट हमारी  शक्षा का आईना ह, पर बलस शीट हमारी समझ, महनत और कम का नतीजा ह। तो
           आइए, हम दोन  को सत लत रख और एक सफल जीवन क  ओर बढ़।
                                  ु


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